ज़रूरी नहीं। मुख्य बात वॉल्यूम का कुल आकार नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता (Volume Quality) है। ट्रेडरों को आकलन करना चाहिए कि वॉल्यूम स्पॉट बाज़ार से आ रहा है या डेरिवेटिव बाज़ार से और वह आक्रामक खरीदारी से संचालित है या लीवरेज वाली पोज़िशन के लिक्विडेशन से।
विश्लेषण के दौरान, ये प्रमुख लेबल वॉल्यूम की प्रकृति और संभावित जोखिमों की तुरंत पहचान करने में मदद कर सकते हैं:
मांग से प्रेरित विस्तार: बढ़ती कीमतों के साथ वॉल्यूम भी बढ़ता है, जो वास्तविक खरीद रुचि दर्शाता है।
डिस्ट्रिब्यूशन का जोखिम: कीमतें रुक जाती हैं जबकि वॉल्यूम तेज़ी से बढ़ता है, जिससे संकेत मिलता है कि बड़े खिलाड़ी बाज़ार के ऊँचे स्तरों पर अपनी होल्डिंग बेच रहे हो सकते हैं।
कमज़ोर तेजी: वॉल्यूम घटते समय कीमतें बढ़ती हैं, जो अपर्याप्त गति और रुझान पलटने के उच्च जोखिम का संकेत है।
कैपिटुलेशन स्पाइक: भारी लिक्विडेशन के कारण वॉल्यूम में विस्फोटक उछाल, जो अक्सर भावनात्मक दबाव से बने बाज़ार के निचले स्तर को चिह्नित करता है।
कम भागीदारी: लगातार कम वॉल्यूम, जो दर्शाता है कि बाज़ार कम गतिविधि वाले समेकन चरण में प्रवेश कर चुका है।